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Shrut Panchami puja on line on May 27th at 7:00AM

JCNC Religious
 


Shrut Panchami  - when one of the most important jain scripture  "Shatkhandaagam" was completed . It was the first time when any Jain shastra was scripted.
It is the day of showing respected for JinVaani by doing shastra daan or by restoring and preserving old jain scriptures and worn out JinVaani books

Please join us for JinVaani puja @ 7:00 Am on Wednesday morning on May 27th. The zoom URL to join for this event is given below:




जैन श्रमणोंने जब यह अनुभव किया कि शिष्य वर्ग की स्मरण शक्ति उत्तरोत्तर क्षीण होती जा रही है, जिन वाणी को सुरक्षित नहीं रखा जा सकेगा, इनके न रहने से ज्ञान भी नहीं रहेगा। अत:ज्ञान परम्परा को शताब्दियों तक अबाध रूप से सुरक्षित करने के लिए इनका लिपिबद्ध होना आवश्यक है। तब शास्त्रों का लेखन सम्पन्न किया गया।

गुजरात प्रान्त में स्थित श्री गिरनारपर्वत की चन्द्र गुफामें वयोवृद्ध आचार्यरत्न परम पूज्य 108श्री धरसेनाचार्यमहाराज जप तप ध्यान अध्ययन और स्वाध्याय में निरत थे। वे एक दिन विचार करने लगे कि जैन दर्शन और सिद्धान्त का जो ज्ञान अभी तक अर्जित कर पाया हूं वह मेरी जिह्वा तक सीमित है, भविष्य में जब मेरी समाधि हो जाएगी तो सम्पूर्ण ज्ञान भी विलुप्त हो जाएगा, अत:उन्होंने दक्षिणा पथ की महिमा नगरी के मुनि सम्मेलन को श्रुत रक्षा सम्बंधी पत्र लिखा। उनके पत्र की व्यथा से पूज्य अर्हदबलिवात्सल्य से द्रवीभूत हो गए और उन्होंने अपने संघ के युवा तथा विद्वान मुनिद्वयश्री पुष्पदंतजी एवं श्री भूतबलिजी को गिरनारपहुंच कर ग्रन्थ लेखन की आज्ञा दे दी।

दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार इस दिन जैन आचार्य धरसेन के शिष्य आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबलि ने 'षटखंडागम शास्त्र' की रचना पूर्ण की थी, और यही शास्त्र प्रथम लिपिबद्ध उपलब्ध है तथा इसकी रचना लगभग 2,000 पूर्व की है, मात्र भगवान् महावीर स्वामी के मोक्ष जाने के 683 वर्ष बाद की ! 

इस ग्रन्थ को सर्वोपरि और सिद्धांत मूल ग्रन्थ माना जाता है जिस पर वीरसेन आचार्य जी तथा इनके शिष्य जिनसेन स्वामी जी ने टीका की है !
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Rikesh Shah & Padmesh Parekh
VP & Co-VP of Religious Programs
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